MENU

क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की जीवनी -Batukeshwar Dutt Biography

क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त की जीवनी -Batukeshwar Dutt Biography 

                                              
प्रसिद्ध क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) का जन्म नवम्बर 1908 में कानपुर में हुआ था | उनका पैतृक गाँव बंगाल के बर्दवान जिले में था पर उनके पिता गोष्ट बिहारी दत्त कानपुर में नौकरी करते थे | बटुकेश्वर ने 1925 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और तभी माता-पिता दोनों का देहांत हो गया | इसी समय वे सरदार भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद के सम्पर्क में आये और क्रांतिकारी संघठन “हिंदुस्तान रिपब्लिकन सोशलिस्ट एसोसिएशन” के सदस्य बने | सुखदेव और राजगुरु के साथ भी उन्होंने विभिन्न स्थानों पर काम किया |
विदेशी सरकार जनता पर जो अत्याचार कर रही थी उसका बदला लेने और उसे चुनौती देने के लिए क्रान्तिकारियो ने अनेक काम किये | काकोरी की ट्रेन की लुट और लाहौर के पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या इसी क्रम में हुयी तभी सरकार ने केन्द्रीय असेम्बली में श्रमिको की हडताल को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से एक बिल पेश किया | क्रान्तिकारियो ने निश्चय किया कि वे इसके विरोध में ऐसा कदम उठाएंगे जिससे सबका ध्यान इस ओर जाएगा |
8 अप्रैल 1929 को भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) ने दर्शक दीर्घा से केन्द्रीय असेम्बली में बम फेंक कर धमाका कर दिया | बम इस प्रकार बनाया गया था कि जिससे किसी की जान न जाए | बम के साथ ही “लाल पर्चे” की प्रतियाँ भी फेंकी गयी जिनमे बम फेंकने का क्रान्तिकारियो का उद्देश्य स्पष्ठ किया गया था | दोनों ने बच निकलने का कोई प्रयत्न नही किया क्योंकि वे अदालत में बयान देकर अपने विचारों से सबको परिचित कराना चाहते थे |
साथ ही इस भ्रम को भी समाप्त करना चाहते थे कि काम करके क्रांतिकारी तो बच निकलते है अन्य लोगो को पुलिस सताती है | दोनों गिरफ्तार हुए | 6 जुलाई 1929 को भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) ने अदालत में जो संयुक्त बयान दिया , उसका लोगो पर बड़ा प्रभाव पड़ा | इस मुकदमे में दोनों को आजीवन कारावास की सजा हुयी | बाद में लाहौर षडयंत्र केस में भी दोनों अभियुक्त बनाये गये | इसमें भगतिसंह को फांसी की सजा हुयी लेकिन बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) के विरुद्ध पुलिस कोई प्रमाण नही जुटा सकी |
बटुकेश्वर दत्त (Batukeshwar Dutt) को आजीवन कारावास की सजा भोगने अंडमान भेज दिया गया | इसके पूर्व राजबन्दियो के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार के लिए भूख हडताल में बटुकेश्वर दत्त भी सम्मिलित थे | यही प्रश्न जब उन्होंने अंडमान से उठाया तो उन्हें बहुत सताया गया | गांधी जी के हस्तक्षेप से वे 1938 में अंडमान से बाहर आये , पर बहुत दिन तक उनकी गतिविधिया प्रतिबंधित रही | 1942 में “भारत छोड़ो” आन्दोलन में भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था | छुटने के बाद वे पटना में रहने लगे थे | बाद में एक दुर्घटना में घायल हो जाने के कारण 19 जुलाई 1965 को दिल्ली में 54 वर्ष की उम्र उनका देहांत हो गया |

Comment(S)

Show all Coment

Leave a Comment

Post Your Blog

Category

Tag Clouds

Recent Post

Upgraded from Girlfriend 4 0 to Wife 1 0
15-Nov-2025 by Jay Kumar
About NEET National Eligibility cum Entrance Test
09-Mar-2024 by Jay Kumar
aadhaar card rules for children
24-Nov-2022 by Jay Kumar
Digital Transformation
28-Oct-2022 by Jay Kumar
The Great Kabab Factory Express Patna
11-Oct-2022 by Rajeev Katiyar
Desi Cow Ghee Benefits
29-Sep-2022 by Jay Kumar
Bitcoin Investment
26-Sep-2022 by Rajeev Katiyar
Educate About Equality
25-Sep-2022 by Rajeev Katiyar
Ravan Ke Purvjnmo Ki Kahani
25-Aug-2022 by Jay Kumar
Hindi Story of Amarnath Dham
25-Aug-2022 by Jay Kumar

Latest News

Our Sponsors

×